उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने उच्च शिक्षा को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाने तथा इसे और अधिक ”समावेशी तथा न्यायसंगत” बनाने का आह्वान किया है। नायडू ने रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शताब्

DU 100 Years Celebration: उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने उच्च शिक्षा को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाने तथा इसे और अधिक ”समावेशी तथा न्यायसंगत” बनाने का आह्वान किया है। नायडू ने रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शताब्दी समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा मानव विकास, राष्ट्र निर्माण और एक समृद्ध तथा टिकाऊ वैश्विक भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को समाज की गंभीर समस्याओं का समाधान करने के लिए अभिनव और नए विचारों के साथ आना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा, ”ग्रामीण युवाओं को शिक्षा समावेशी और समान रूप से पहुंचे यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षा मानव विकास, राष्ट्र निर्माण तथा एक समृद्ध एवं टिकाऊ वैश्विक भविष्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।” इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

नायडू ने कहा कि शोध का अंतिम उद्देश्य लोगों के जीवन को अधिक आरामदायक और खुशहाल बनाना होना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी होने का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए हमारे मानव संसाधनों की सामूहिक शक्ति का उपयोग किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 को देश के शैक्षिक परिदृश्य में क्रांति लाने वाला एक ”दूरदर्शी दस्तावेज़” करार देते हुए स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने की भी वकालत की और कहा कि यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। नायडू ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा, ”यदि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दी जाए तो वे उसे आसानी से समझ सकेंगे। लेकिन, यदि प्रारंभिक शिक्षा किसी अन्य भाषा में दी जाती है, तो पहले उन्हें वह भाषा सीखनी होगी और फिर वे समझेंगे।” नायडू ने कहा कि प्रशासन और अदालतों में संचार का मुख्य माध्यम स्थानीय भाषा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”हर गजट अधिसूचना और सरकारी आदेश स्थानीय या मूल भाषा में होना चाहिए ताकि आम आदमी इसे समझ सके।” नायडू ने कहा कि प्राचीन भारत विश्वगुरु की प्रतिष्ठा रखता था।

उन्होंने कहा, ”नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, वल्लभी और ओदंतपुरी जैसे विश्वविद्यालयों में ज्ञान के प्रतिष्ठित केंद्र इस तथ्य के पर्याप्त प्रमाण हैं।” उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय को 100 साल पूरे करने पर बधाई भी दी। नायडू ने कहा, ”मैं इस विश्वविद्यालय की उन्नति, विकास और प्रगति के लिए तथा इसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक बनाने के लिए सभी लोगों को बधाई देना चाहता हूं।” नायडू ने इस अवसर पर स्नातक पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2022 (हिंदी, संस्कृत और तेलुगू संस्करण) को जारी किया। इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा हासिल की गईं उपलब्धियों को दर्शाने वाली पुस्तिका ‘दिल्ली विश्वविद्यालय:एक झलक’ भी जारी की गयी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने से छात्रों की रचनात्मकता को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रधान ने कहा, ”राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा के महत्व पर जोर दिया गया है। स्थानीय भाषा छात्रों की रचनात्मकता को दिशा देने में मदद करती है।” इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने कहा, ”हमने अकादमिक उत्कृष्टता के 100 साल पूरे कर लिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय बहुत अच्छा कर रहा है। हम भारतीयों के जीवन में अपना योगदान देना जारी रखेंगे।”

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