एक-दो नहीं, 3 बार फेल होने के बाद भी नहीं मानीं हार, 5वें प्रयास में IAS बना ये शख्स

 निवृत्ति महाराष्ट्र के नासिक जिले के गुवांच गांव के निवासी हैं। उन्होंने यहां से अपनी पूरी पढ़ाई की है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के लिए बड़ागांव पिंपरी माध्यमिक विद्यालय 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। उनके माता-पिता दोनों ही खेती करते हैं।

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में एक या दो बार एग्जाम में फेल होने पर उम्मीदवारों को आत्मविश्वास थोड़ा कमजोर पड़ने लगता है। असफलता मिलने पर कैंडिडेट्स हताश हो जाते हैं। हालांकि, परीक्षा में मिली नाकामयाबी को वे अपने पर हावी नहीं होने देते हैं। अपनी कमियों पर काम करते हैं। दिन-रात मेहनत करते हैं। अंत में नतीजा सबके सामने होता है। वे दुनिया की सबसे मुश्किल परीक्षा को क्रैक कर लेते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है एक और अभ्यर्थी ने। इस व्यक्ति का नाम है निवृत्ति सोमनाथ ने। निवृत्ति ने UPSC की परीक्षा में एक या 2 नहीं बल्कि 3 बार असफलता पाई। इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी। वे डटे रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें कामयाबी मिली। आइए डालते हैं उनके सफर पर एक नजर।



निवृत्ति ने सरकारी स्कूल से की है पढ़ाई

निवृत्ति महाराष्ट्र के नासिक जिले के गुवांच गांव के निवासी हैं। उन्होंने यहां से अपनी पूरी पढ़ाई की है। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के लिए बड़ागांव पिंपरी माध्यमिक विद्यालय 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। उनके माता-पिता दोनों ही खेती करते हैं।

नौकरी में नहीं लगा मन

निवृत्ति ने स्कूली एजुकेशन पूरी करने के बाद सिंहगढ़ कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने तीन साल नौकरी भी की, लेकिन उनका मन नौकरी में नहीं लगा। ऐसे में उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैायरी करना शुरू कर दी थी।

क्रैक की परीक्षा

पूरी तैयारी के साथ निवृत्ति ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद वे सेल्स अधिकारी बन गए। हालांकि, इस दौरान उनके दिलो-दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। वे आईएएस बनना चाहते थे और इसलिए उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी।

3 बार यूपीएससी में हुए फेल

निवृत्ति ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करने के लिए दिन-रात जी तोड़ मेहनत शुरू कर दी थी। वे सटीक रणनीति बनाकर आगे बढ़ रहे थे। कंप्लीट तैयारी के बाद उन्होंने अपना पहला अटेम्प्ट दिया। हालांकि, सफलता उन्हें नहीं मिली। यह केवल पहले प्रयास में नहीं हुआ। दूसरे और तीसरे में भी वे फेल हो गए। हालांकि, इस दौरान वे हताश हुए। लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

5वें प्रयास में पूरा हुआ सपना

वे मजबूती से डटे रहे। पढ़ाई करते रहे। कमियों पर काम करते रहे। इसके साथ ही उन्होंने चौथी बार फिर वे यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में बैठे। इस बार वे सफल हुए। हालांकि, उन्हें आईआरएस का पद मिला था। लेकिन उनके भीतर IAS बनने की ललक थी। इसलिए निवृत्ति ने फिर एग्जाम दिया और इस बार उनका सपना पूरा हुआ। 5वें प्रयास में 66वीं रैंक के साथ वह साल 2020 में आईएएस बन गए।



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