मां के सपने को बेटे ने बनाया अपना, यूपीएससी परीक्षा में 67वीं रैंक लाकर पूरा किया ख्वाब

वासु पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे थे। हालांकिपहली बार में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में प्रीलिम्स एग्जाम भी क्रैक नहीं कर पाए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला था। वे तैयारी करते रहे। वे दोबारा फिर एग्जाम में बैठे थे।

आईएएस सक्सेस स्टोरी काॅलम में हर दिन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल लेने वाले परीक्षार्थियों की कहानी सुनाते हैं। इसी कड़ी में आज म ऐसे शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसने अपनी मां के सपने को अपना बना लिया है। इस शख्स का नाम है वासु जैन। जैन की मां यूपीएससी परीक्षा क्रैक करके IAS बनना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने एग्जाम भी दिया था लेकिन वे एग्जाम में सफल न हो सकीं। वासु ने मां के सपने को अपना बनाते हुए UPSC परीक्षा क्रैक करने की ठानी। हालांकि, जैन खुद भी प्रशासनिक अधिकारी बनने की इच्छा रखते थे। इसलिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और अंत में परीक्षा में सफलता हासिल की। आइए डालते हैं उनके सफर पर एक नजर।

वासु सिविल सेवा परीक्षा में बैठने से पहले एक लॉ फील्ड से जुड़े थे। उन्होंने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। जैन पढ़ाई में काफी अच्छे थे। उन्होंने न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा के साथ एक लॉ क्लर्क के रूप में भी इंटर्नशिप की, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों में से एक थे।

यूपीएससी क्रैक करने की ठानी

वासु जैन बताते हैं कि, मां UPSC सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करना चाहती थीं। वे एग्जाम में भी शामिल हुई थीं। हालांकि, उन्हें सफलता नहीं मिली थी। इसके बाद, उन्होंने तय किया था कि वे इस परीक्षा में भाग लेंगे और सफल होंगे।

ऐसे की तैयारी

वासु ने तैयारी के लिए एक सटीक रणनीति बनाई। उन्होंने ज्यादा किताबें नहीं पढ़ी, बल्कि हर विषय के लिए वे बुक्स को ठीक ढंग से पढ़ा करते थे। वे बताते हैं कि उनकी लॉ की पढ़ाई ने भी तैयारी में काफी मदद की है। वे कहते हैं कि सिर्फ वे एनसीईआरटी की किताबें पढ़ते रहें।

दो बार मिली असफलता

वासु पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे थे। हालांकि, पहली बार में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में प्रीलिम्स एग्जाम भी क्रैक नहीं कर पाए थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला था। वे तैयारी करते रहे। इसके बाद वे दोबारा फिर एग्जाम में बैठे थे। इस बार भी केवल प्रीलिम्स और मेंस परीक्षा में सफल हो पाए थे।

67वीं रैंक लाकर पूरा हुआ सपना

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में दो बार फेल होने के बाद वे थोड़ा परेशान जरूर हुए लेकिन फिर भी नाकामी को भूल कर अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि आखिर में उन्हें सफलता मिली। इस बार उन्होंने एग्जाम के तीनों चरण पास कर लिए थे। परीक्षा में उन्हें 67वीं रैंक मिली थी।

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