साउथ रीमेक्स की भीड़ में ‘गुमराह’ हुई आदित्य रॉय कपूर और मृणाल ठाकुर की फिल्म

 हिंदी सिनेमा में इस वक्त साउथ फिल्मों के इतने रीमेक्स बन रहे हैं मगर बॉक्स ऑफिस पर काम नहीं कर रहे। अजय देवगन की दृश्यम 2 के बाद हिंदी में रीमेक हुई कोई फिल्म सफल नहीं हुई है।

सिनेमाघरों में फिल्म कारोबार की खस्ता हालत के बीच लगातार दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक आ रहे हैं। इस साल सेल्फी, शहजादा और भोला के बाद अब तमिल क्राइम थ्रिलर थडम की रीमेक फिल्म गुमराह इस शुक्रवार सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। वर्धन केतकर निर्देशित फिल्म में आदित्य रॉय कपूर और मृणाल ठाकुर ने मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं।

रीमेक फिल्मों के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि निर्देशक मूल फिल्म के हर दृश्य को हू-ब-हू उतारने की कोशिश करते हैं। खासकर, मिस्ट्री थ्रलर फिल्मों के लिए यह फॉर्मूला घातक साबित होता है, क्योंकि मूल फिल्म और रीमेक के निर्माण के बीच का सालों का फासला इस रोमांच का कत्ल कर चुका होता है।

ओटीटी के जमाने में तो यह फासला और भी नुकसानदायक हो सकता है, जहां तमाम दक्षिण भारतीय फिल्में सबटाइटल या डब वर्जन के साथ मौजूद हैं।



गुमराह, 2019 में आयी तमिल फिल्म थडम का रीमेक है, जिसमें अरुण विजय ने लीड रोल निभाया था।
क्या है गुमराह की कहानी?

फिल्म की कहानी दिल्ली में दिखायी गयी है। एक बंगले में कत्ल होता है, मगर मौका-ए-वारदात से पुलिस को कोई सबूत या ऐसा सिरा नहीं मिलता, जिसे पकड़कर कातिल की तमाश की जाए। मगर, एक पड़ोसी की सेल्फी में कातिल का चेहरा जरूर कैद हो जाता है, जिसके आधार पर एसआई शिवानी माथुर अपनी जांच आगे बढ़ाती है और आखिरकार इंजीनियर अर्जुन को पकड़ लिया जाता है।

अर्जुन खुद को निर्दोष बताता है, मगर उसके बयान में काफी लूपहोल होते हैं। एसीपी यादव अपने तरीकों से अपराध कबूल करवाना चाहता है। इस बीच रॉनी नाम का एक और शख्स पकड़ा जाता है, जो अर्जुन का हमशक्ल होता है। रॉनी छोटे-मोटे अपराधों में लिप्त रहता है। अब शिवानी के सामने असली कातिल को पकड़ने की चुनौती है।

गुमराह की कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित बतायी जाती है, जिसका जिक्र एंड क्रेडिट्स में किया भी गया है। फिल्म का प्लॉट दिलचस्प है। कहानी एक कत्ल से शुरू होती है और फिर हमशक्लों के बीच फंसती है। दोनों के अपने-अपने दावे हैं। किस पर यकीन किया जाए, किस पर नहीं और कैसे गुत्थी को सुलझाया जाए? मगर, इसे जिस तरह से विस्तार दिया गया है, उसमें फिल्म बहक जाती है।
कैसा है गुमराह का स्क्रीनप्ले और अभिनय?

मागिज थिरुमेनी की कहानी पर असीम अरोड़ा ने स्क्रीनप्ले लिखा है। कहानी में कुछ परतें जोड़ी गयी हैं, जिससे फिल्म की रवानगी प्रभावित होती है। इनमें से कुछ कहानी के मुख्य कथ्य को सपोर्ट भी नहीं करते। अभिनय की बात करें तो आदित्य रॉय कपूर ने अर्जुन और रॉनी को अलग दिखाने की पूरी कोशिश की है। उन्होंने स्क्रीन पर पहली बार डबल रोल निभाया है।

पहनावे, बोलचाल और शारीरिक भाषा के अनुरूप उन्होंने दोनों किरदारों को अलग रखा है। मृणाल ठाकुर इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर के किरदार में ठीक लगी हैं। रॉनित रॉय ने अक्खड़ और बदमिजाज पुलिस अफसर के किरदार को विश्वसनीय ढंग से पेश किया है। अर्जुन की गर्लफ्रेंड जाह्नवी के रोल में वेदिका पिंटो ने अपने किरदार से न्याय किया है।

कलाकार- आदित्य रॉय कपूर, मृणाल ठाकुर, रॉनित रॉय आदि।

निर्देशक- वर्धन केतकर

अवधि- 2 घंटा 17 मिनट



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