हृदय रोग के उपचार के बाद रोजाना जरूर करें योग, मिलेंगे 5 फायदे

इस योग दिवस पर, सुनिश्चित करें कि ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने के लिए शारीरिक व्यायाम को मानसिक तंदुरुस्ती के साथ जोड़ा जाए.

योगगुरु श्री बीकेएस अय्यंगार के अनुसार, “योग न केवल चीज़ों को देखने के हमारे तरीकों में परिवर्तन लाता है, बल्कि यह देखने वाले व्यक्ति को ही परिवर्तित कर देता है।”

योग जीवन के प्रति हमारे दृष्टिकोण में बदलाव लाता है और इसलिए हमारे स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव किसी पुनर्निर्माण की तरह होता है। स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण घटक है; क्योंकि हृदय संबंधी उपचार पद्धति-एंजियोप्लास्टी, बायपास सर्जरी या फिर एक हृदय प्रत्यारोपण के बाद सेहत को पुन: प्राप्त करना अक्सर चुनौतीपूर्ण और एक ज़बरदस्त रूप से अभिभूत करने वाला अनुभव है। स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के दौरान शारीरिक असुविधा, चिंता और भावनात्मक तनाव मरीज़ों द्वारा सामना किए जाने वाली सामान्य चुनौतियां हैं।

पिछले एक दशक में, सामान्य स्थिति में लौटने में एक प्रभावी सहायता के रूप में योग ने मान्यता हासिल की है। यह एक आसान व्यायाम का विकल्प देता है। और ऐसे लोगों के लिए यह सबसे योग्य है जिनका हृदय रोग के लिए ऑपरेशन किया गया है। इसके साथ ही योग शरीर में लचीलापन, मजबूती, संतुलन और समन्वय विकसित करने या वापस पाने में सहायता करता है।

श्वसन तकनीकों और नियंत्रित और सतर्कता से किये गए योग से ही रक्त संचरण, लचीलेपन और शरीर में मजबूती जैसे केंद्रों पर सुधार देखा जा सकता है ।
हृदय के उपचार के बाद योग से होने वाले प्रमुख लाभ
मस्तिष्क-शरीर के संबंध को सुधारता है

योग, हृदय उपचार के बाद मरीजों को अपने शरीर से एक बार फिर जुड़ने के लिए एक नया एवं अनोखा रास्ता प्रदान करता है। यह मरीजों को अपनी शारीरिक क्षमताओं में एक बार फिर आत्म-विश्वास पाने में सहायता करता है और स्वयं के बारे में संपूर्ण समझ को सुदृढ करता है।
विश्रांति (आराम) को बढ़ावा देता है

योग से जुड़े गहरी साँस वाले व्यायामों और ध्यान के कारण एक शांति की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे ब्लड प्रेशर, ह्रदय गति और कॉर्टिसोल के स्तर को कम करने में सहायता मिलती है- और यह सब स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने में सहायक होते हैं।

आत्म-जागरूकता और सजगता में वृद्धि

योग के कारण व्यक्ति के लिए अपने शरीर को सुन पाना और अपने अभ्यास का समायोजन करना संभव हो पाता है। यह आत्म-जागरूकता को बढ़ावा देता है और व्यक्तियों का सक्षमीकरण करने में सहायक होता है ताकि वे अधिक स्वास्थ्यप्रद जीवनशैली विकल्पों, जैसे कि ह्रदय के लिए सेहतमंद आहार अपनाना, तनाव का प्रबंध करना और नियमित शारीरिक गतिविधियों में शामिल कर सके ।
भावनात्मक चुनौतियों से निपटने में सहायता करता है

लंबे समय तक योग का अभ्यास करने से व्यक्ति की मानसिक स्थिति ‘प्रतिक्रियात्मक’ से ‘उत्साहपूर्वक अनुकूल’ में बदल जाती है। इससे व्यक्तियों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से जूझने में सहायता मिलती है, जिनका अक्सर हृदय उपचार के बाद सामना करना पड़ता है।
कार्डियोवास्कुलर कंडीशनिंग में सहायता करता है

जब ‘कार्डियो’ शब्द का उल्लेख होता है तो पैदल चलना या साइकिल चलाने जैसे एरोबिक व्यायाम के किसी रूप के बारे में आम तौर पर लोग कल्पना करते हैं। हालांकि विभिन्न योगिक अभ्यास जैसे विन्यास योग, फ्लो स्टाइल योग, सूर्य नमस्कार व्यावहारिक हैं और हृदय की मजबूती में सुधार लाने के लिए प्रभावी विकल्प हैं।

इस प्रकार स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया में योग को एकीकृत करने से कई लाभ हो सकते है जो शारीरिक स्वास्थ्य लाभ से भी आगे जाते हैं। योग की दिनचर्या शुरू करने से पहले आपके डॉक्टर या विशेषज्ञों के साथ परामर्श करना महत्वपूर्ण है ताकि एक सुरक्षित और प्रभावी अभ्यास सुनिश्चित किया जा सके जो प्रत्येक व्यक्ति की अनोखी ज़रूरतों को पूरा करे और इस प्रकार एक संचयी और प्रगतिशील स्वास्थ्य-लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

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