Explained: अब चर्चा ‘INDIA’ की, पर NDA और UPA की दिलचस्प है कहानी; दोनों गठबंधन पर हैं घोटालों के दाग!

Explained एनडीए का गठन मई 1998 में हुआ था और इसके पहले संयोजक जॉर्ज फर्नान्डिस बने थे। जॉर्ज फर्नान्डिस के बाद शरद यादव को इसका संयोजक बनाया गया। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का गठन 2004 में लोकसभा चुनाव के बाद हुआ था। इसका नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में है। इस गठबंधन का उदेश्य 2004 में केंद्र में सरकार बनाना था।
अब चर्चा ‘INDIA’ की, पर NDA और UPA की दिलचस्प है कहानी।

 लोकसभा चुनाव- 2024 की सरगर्मियां तेज हो गई है। आम चुनाव से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष एड़ी-चोटी एक करने में जुट गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने खेमे में विभिन्न राजनीतिक दलों को शामिल करने में लगी है। हालांकि, चुनाव से पहले गठबंधन की नीति कोई नई नहीं है।

इसी कड़ी में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग/यूपीए) ने अपना नाम बदलकर ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस’ यानी कि ‘INDIA’ कर दिया है। वहीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग/एनडीए) ने अपने नाम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं किया है। आइए जानते हैं दोनों गठबंधन- एनडीए और यूपीए की कहानी।

एनडीए का गठन कब हुआ?

एनडीए का गठन मई 1998 में हुआ था और इसके पहले संयोजक जॉर्ज फर्नान्डिस बने थे। जॉर्ज फर्नान्डिस के बाद शरद यादव को इसका संयोजक बनाया गया। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद एन चंद्रबाबू नायडू को एनडीए के संयोजक बनाया गया।

क्यों हुआ था एनडीए का गठन?

गैर कांग्रेसी सरकार बनाने की मकसद से एनडीए का गठन किया गया था। एनडीए के गठन के समय इसमें 16 राजनीतिक दल शामिल थे। हालांकि, बाद में कई दल इससे निकल गए और कई नए दल इस गठबंधन का हिस्सा बने। एनडीए का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथ में है। वर्तमान में इस गठबंधन में 38 दल शामिल हैं।
एनडीए में गठन के समय कितने दल शामिल हुए?

एनडीए में भाजपा के अलावा कई दल शामिल थे। एनडीए में विभिन्न राज्यों से कई राजनीतिक दल साथ आए थे। एनडीए में शामिल होने वाली पार्टियों के नामःभाजपा
तृणमूल कांग्रेस
एआईएडीएमके
समता पार्टी
शिवसेना
बीजू जनता दल
लोक शक्ति
शिरोमणि अकाली दल
पीएमके
जनता पार्टी
एमडीएमके
हरियाणा विकास पार्टी
एनटीआर
तेलुगु देशम पार्टी
जनता दल
मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट
एनडीए के समय चर्चित विवाद

एनडीए के शासन काल में पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के समय कई विवाद सामने आए थे। इनमें तहलका ऑपरेशन, स्टॉक मार्केट स्कैम, यूटीआई स्कैम सहित कई और विवाद शामिल थे।

यूपीए का गठन कब हुआ था?

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का गठन 2004 में लोकसभा चुनाव के बाद हुआ था। इसका नेतृत्व कांग्रेस के हाथ में है। इस गठबंधन का उदेश्य 2004 में केंद्र में सरकार बनाना था। इस वर्ष यानी कि 2023 में यूपीए का नाम बदलकर INDIA कर दिया गया है। वर्तमान में इस गठबंधन में 26 दल हैं। यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं।
क्यों हुआ था यूपीए का गठन?

2004 के आम चुनाव में कांग्रेस को 145 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, भाजपा ने 138 सीटें जीती थीं। इसके बाद कांग्रेस ने अपने नेतृत्व में यूपीए का गठन किया था। इसमें कांग्रेस और वाम दल ने अहम भूमिका निभाई थी।
यूपीए गठन के समय कितने दल आए थे साथ?

यूपीए गठन के समय 15 पार्टियां साथ आई थीं। इसके तहत एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम साझा किया गया था। यूपीए में शामिल होने वाली पार्टियों के नामःकांग्रेस
राष्ट्रीय जनता दल
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम
लोक जनशक्ति पार्टी
तेलंगाना राष्ट्र समिति
पट्टाली मक्कल काटची
झारखंड मुक्ति मोर्चा
मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन
पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया(G)
केरल कांग्रस (J)

यूपीए के समय चर्चित विवाद

यूपीए के गठन के बाद जब मनमोहन सिंह पीएम बने थे तब कई घोटाले सामने आए थे। खासकर यूपीए का दूसरा कार्यकाल काफी विवाद रहा था। यूपीए- दो के समय ऐसे कई विवाद सामने आए, जिस वजह से विपक्ष हमेशा इसे भुनाता रहता है।

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